वैदिक विचारों से जीवन होता उज्ज्वल। जैसे नदियों में होता पवित्र जल।।

सब का वरणीय एक सच्चिदानन्दस्वरूप परमेश्वर ही है
  •  16/11/2019 10:40 AM
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हमारे पूर्वजन्म के शुभ कर्मों के आधार पर हमें सभी प्राणियों में श्रेष्ठ मनुष्य योनि में जन्म मिला है। जीवन का कुछ व अधिकांश भाग हम व्यतीत कर चुके हैं। कुछ भाग शेष है जिसके बाद हमारी मृत्यु का होना अवश्यम्भावी है और यह निर्विवाद सत्य है। हम जीवन में शरीर के पालन हेतु आहार, विहार तथा व्यायाम आदि पर ध्यान देते हैं। कुछ लोग जिह्वा के स्वाद में पड़कर आहार के नियमों का उल्लंघन भी करते हैं।

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अवतारवाद वेदविरुद्ध
  •  11/5/2019 10:02 AM
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प्रश्न―"ईश्वर अवतार लेता है"―भगवान श्री कृष्ण ने तो गीता में ऐसा ही कहा है।* उत्तर―*अवतार कहते हैं―ऊपर से नीचे उतरना। आत्मा एकदेशी है, अतः उसका अवतरित होना सम्भव है, इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। पहले भगवान किसे कहते हैं इसे समझने की आवश्यकता है।

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आस्तिक- नास्तिक संवाद
  •  27/4/2019 09:42 AM
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नास्तिक― इस संसार का कर्त्ता,धर्त्ता,संहर्त्ता कोई नहीं।आग,हवा,मिट्टी,पानी चारों तत्व स्वतः अपने आप स्वभाव से मिलते हैं और उससे जगत की उत्पत्ति हो जाती है।

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ईश्वर को जानने का सरलतम विधि क्या है?
  •  27/4/2019 09:27 AM
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🌷प्रत्येक व्यक्ति सरलतम रूप में ईश्वर को जानना व उसे प्राप्त करना चाहता है। हिन्दू समाज में अनेकों को मूर्ति पूजा सरलतम लगती है क्योंकि यहां स्वाध्याय, ज्ञान व जटिल अनुष्ठानों आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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अधर्म का खण्डन करें या न करें, क्या धर्म अनेक होते हैं?
  •  27/4/2019 09:02 AM
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प्रश्न) आप सब धर्मो का खंडन करते ही आते हो परन्तु अपने अपने धर्म में सब अच्छे है। किसी भी धर्म का खंडन नहीं करना चाहिए।जो आप दूसरे के धर्मो का खंडन करते हो तो आप इन से विशेष क्या बतलाते हो?......

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